Bhartiya Sanskriti

Bhartiya Sanskriti

भारतीय संस्कृति एक व्यापक संस्कृति है, इसी को हिन्दू संस्कृति या सनातन संस्कृति भी कहते हैं।  प्रस्तुत पुस्तक में संस्कृति और सभ्यता में क्या अन्तर है? संस्कृति और ध्र्म क्या है? ईश्वर क्या है? ईश्वर को मानने की आवश्यकता, सभी जीवों में ब्रह्म की एकता, उपासना प(तियों का स्वरूप और उनका प्रयोजन, उनका मार्ग आदि का निरूपण सरल ढंग से किया गया है।

पुस्तक में भारतीय संस्कृति के अन्तर्गत चार आ श्रमों- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास के अतिरिक्त वर्णाश्रमों यथा- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र की उत्पत्ति, उनके कार्य व उनमें जीवरूप से समानता का सि(ान्त प्रतिपादित किया गया है। भारतीय संस्कृति में शिष्टाचार, सदाचार और शिखा ;चोटीद्ध रखने का बहुत महत्त्व है। यह क्यों है? इसकी वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला गया है। 

वर्णाश्रम में तिलक व यज्ञोपवीतधरण का विशेष महत्त्व है। इसकी वैज्ञानिकता और अनिवार्यता पर भी प्रकाश डाला गया है। व्रत व पर्व क्या हैं? उनके कितने भेद हैं? ये क्यों आवश्यक हैं? इनपर विस्तृत चर्चा की गयी है, साथ ही परलोक, पुनर्जन्म और कर्मपफल क्या हैं? परलोक कहां है? इसपर भी संक्षिप्त किन्तु सम्पूर्ण चर्चा की गयी है। 

इसके साथ ही पुराणों में सृष्टि का स्वरूप तथा अवतार की कल्पना पर भी बहुत कुछ सामग्री है। तीर्थ किसे कहते हैं? तीर्थयात्रा का उद्देश्य क्या है? तीर्थ कितने प्रकार के होते हैं?- इन सब बातों का इस पुस्तक में वर्णन है। इस प्रकार यह पुस्तक भारतीय संस्कृति के विविध् आयामों को गागर में सागर की भाँति प्रस्तुत करती है। भारतीय संस्कृति के बारे में जानने के लिए एक अद्वितीय, अनुपम और सबके लिए पठनीय यह पुस्तक है।




डाॅ॰ सच्चिदानन्द शुक्ल ने गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से हिन्दी साहित्य में एम॰ए॰, काशी विद्यापीठ, वाराणसी से हिन्दी साहित्य में पी-एच॰डी॰ तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद से संस्कृत विषय में साहित्य रत्न एवं आयुर्वेद रत्न की उपाध्यिाँ प्राप्त कीं। सन् 1980 से 1986 तक हिन्दी प्रवक्ता के रूप में कार्य किया। एक हजार से अध्कि रचनाएँ विभिन्न पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।

‘नाथद्वारा साहित्य मण्डल’ नाथद्वारा ;चित्तौड़द्ध द्वारा ‘सम्पादक शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित। हिन्दी साहित्य व हिन्दूलाॅजी विषयक लेखों व पुस्तकों के शोध्परक लेखन में विशेष रुचि।

पुस्तक महल से प्रकाशित फ्भारतीय संस्कृति के विविध् आयामय् इनकी प्रथम पुस्तक है।


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