भारतीयों की प्राचीनकाल से ही यह मान्यता रही है कि पशु–पक्षी उनके जीवन का अभिन्न अंग हैं. अपने इसी प्रेम की अभिव्यक्ति वे उनके संरक्षण और देख–रेख में करते हैं.
हिन्दुओं के देवी–देवताओं का वाहन या तो कोई पशु है या फिर कोई पक्षी. ये वाहन समय आने पर उन्हें उनके लोकों से अन्य लोकों का भ्रमण ही नहीं कराते, अपितु अपने दिव्य गुण–संपन्न स्वामियों के जीवन के अन्य संदर्भों में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. ये युद्ध भूमि में जहां शत्रुओं का संहार करते हैं, वहीं अपने स्वामियों के भक्तों की श्रद्धा–भक्ति की परीक्षा भी लेते हैं. प्रस्तुत कथासंग्रह में निम्नलिखित कहानियां हैं:
• गणपति का गज–मुख
• एकदंत श्रीगणेश
• कामनापूर्ति करने वाली गौ–कामधेनु
• महिषासुर पर मॉं दुर्गा की विजय
• अय्यप्पन की कथा
• गजासुर से भगवान शिव की रक्षा
• इन्द्र लोक तक्षक
• युधिष्ठर का स्वर्गगमन
इन कहानियों में ज्ञान के साथ–साथ रोचकता, मनोरंजन और लोककथाओं व पुराणों की कथाओं का समन्वय है, जो बच्चों का ही नहीं, परिवार के प्रत्येक सदस्य का मनोरंजन करेगी.
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