चक्र एवं कुंडलिनी बहुत गूढ़ विद्या होने के कारण इससे संबंधित ज्ञान साधकों, योगियों और आचार्यों तक ही सिमटा रहा। सामान्य जन तक इसकी पहुंच ही नहीं हो सकी। इसीलिए वे इस सर्वकल्याणकारी विद्या से वंचित और अनभिज्ञ रहे। अतः विद्वान् लेखक, प्रशिक्षक एवं योगाचार्य ने इस अड़चन को दूर करने के लिए यह पुस्तक लिखी है, ताकि साधारण जिज्ञासु भी इस अनूठी विद्या को समझ सकें, इसमें पारंगत हो सकें तथा अपना व सबका कल्याण कर सकें। कुंडलिनी साधना में संलग्न साधक भी इस पुस्तक को पढ़कर बहुत ही व्यावहारिक ढ़ग से इसे सीख और समझकर इस पर अमल कर सकेंगे। कुंडलिनी जागरण के बारे में आम लोगों में जो भ्रान्तियां फैली हुई हैं, इसे पढ़कर उनका निराकरण भी किया जा सकता है। यह पुस्तक वास्तव में सर्वसाधारण के लिए एक सरल मार्गदर्शिका है।
^ Top