महान् मनीषी लगध के अनुसार वेदों के छः अंगों में से ज्योतिष वेदांग, विश्व का प्राचीनतम ग्रन्थ है. भारतीय ज्योतिष इसी वेदांग की देन है. इसमें आकाशमंडल के ग्रह नक्षत्रों की गणना, स्थिति, परिस्थिति, गति, दूरी, अनय, गोल, ऋतु, लग्न साधन आदि अनेक तथ्य उजागर हैं. विश्व इसकी सत्ता और सत्यता को स्वीकार करता है. ज्योतिष विज्ञान पूर्णतः गणितीय आकलन व परिमाप पर आधारित है. इससे मानव जीवन को प्रभावित करने वाली घटनाओं और दैनिक क्रियाकलापों के प्रभाव का ज्ञान होता है. ज्योतिष विज्ञान द्वारा हम जीवन के सुख-दुःख, लाभ-हानि, उन्नति-अवनति, यश-अपयश आदि के बारे में जान सकते हैं.
प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने तकरीबन सभी विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है. पुस्तक में व्यवहारोपयोगी शब्दों का अलग अध्याय है.
जन्म कुण्डली रचना के अध्याय में जन्म कुण्डली बनाने की सरल विधि समझाई गई है. अष्टम व नवम अध्याय फलित से संबंध रखते हैं.
^ Top