38 Shri Krishna Leelayan

38 Shri Krishna Leelayan

38 श्रीकृष्ण लीलाएं

महाभुति व्यास को अनेकों पुराणों की रचना कर लेने के बाद भी मानसिक शान्ति नहीं मिली तब नारद के उपदेश पर उन्होंने भक्तिरस में डूबकर भगवान् श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करने के लिए श्रीमद्भागवत पुराण की रचना की। इसमें उन्होंने श्रीकृष्ण की बचपन से लेकर उनके विवाह आदि की लीलाओं का वर्णन किया और सर्वप्रथम उसे अपने पुत्रा शुकदेव को सुनाया, जिसे सुनकर शुकदेव जैसा वीतरागी भी भाव-विह्नल हो उठा।

श्रीकृष्ण की उन्हीं 38 लीलाओं का वर्णन इस पुस्तक ‘38 श्रीकृष्ण लीलाएं’ में दी गयी हैं। ये कथाएं हिन्दी भाषा में अत्यन्त रोचक व सरल शैली में दी गयी हैं, जिन्हें पढ़कर व सुनकर बच्चे ही नहीं, युवक, प्रौढ़, स्त्राी-पुरुष भी आनन्दित होकर भाव-विभोर हो उठेंगे। इन कथाओं में रोचकता है, सरलता है और पूर्ण आनन्द भी है। आप भी पढ़ें, पूरे परिवार को पढ़ने के लिए दें।



डाॅ. सच्चिदानंद शुक्ल ने गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से हिन्दी साहित्य में एम.ए., काशी विद्यापीठ, वाराणसी से हिन्दी साहित्य में पी.एच.डी. तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद से संस्कृत विषय में साहित्य रत्न एवं आयुर्वेद रत्न की उपाध्यिाँ प्राप्त कीं। सन् 1980 से 1986 तक हिन्दी प्रवक्ता के रूप में कार्य किया। एक हजार से अध्कि रचनाएं विभिन्न पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।

‘नाथद्वारा साहित्य मण्डल’ नाथद्वारा ;चित्तौड़द्ध द्वारा ‘सम्पादक शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित। हिन्दी साहित्य व हिन्दूलाॅजी विषयक लेखों व पुस्तकों के शोध्परक लेखन में विशेष रुचि। ‘38 श्रीकृष्ण लीलाएं’ पुस्तक महल से प्रकाशित इनकी द्वितीय पुस्तक है। पुस्तक महल से प्रकाशित इनकी प्रथम पुस्तक ‘भारतीय संस्कृति के विविध् आयाम’ है।


Write a review

Note: HTML is not translated!
    Bad           Good

Super Fast Shipping

Pustak Mahal will Provide Super Fast Shipping

0 Product(s) Sold
  • INR 100.00
  • Ex Tax: INR 100.00

Tags: 38 Shri Krishna Leelayan