Aapsi Rishton Mein Kadwahat Keise Dur karein

Aapsi Rishton Mein Kadwahat Keise Dur karein

भारतीय परिवारों में रिश्ते-नातों की खास अहमियत होती है। वास्तव में परिवार बनता ही है रिश्तों के मेल-जोल से। लेकिन आज एकल परिवार का जो पैफशन चल पड़ा है उससे तो यही लगता है कि रिश्तों में अब वैसी गर्माहट नहीं रह गई। और तो और रिश्तों के बीच की खाईयां इतनी बढ़ती जा रही हैं कि अब तो एकल परिवारों में भी बिखराव आम बात-सी होती जा रही है। एक पिता के दो बच्चे साथ-साथ पढ़ते-लिखते हैं। और जब वे बड़े हो जाते हैं तो उनमें बनती ही नहीं है। वे पैरेंट्स के सामने ही अपना-अपना एकल परिवार बसा लेते हैं। पैरेंट्स से उनका कोई रिश्ता नहीं रह जाता। इससे सापफ जाहिर होता है कि लोगों के दिलोदिमाग से रिश्तों की समझ धूमिल होती जा रही है। तभी तो घर में एक रिश्ते के होते हुए भी बाहर दूसरा अवैध् रिश्ता बनाने का प्रचलन चल पड़ा है। आज महिला मित्रा, पुरुष मित्रा जैसे संबोध्नों के साथ लोग जीने लगे हैं। जो तलाक का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। 

‘आपसी रिश्तों में कड़वाहट कैसे दूर करे?’ नामक पुस्तक हमारा ऐसा प्रयास है जो रिश्तों के बीच पनपी कड़वाहट की बारीकियों से जुड़ी है। यह पुस्तक रिश्तों को सजाने-संवारने की एक कड़ी 

और एक नायाब पफार्मूला है। जो प्रत्येक मां-बेटी, सास-ससुर, भाई-बहन, पति-पत्नी सहित 

तमाम रिश्तों में पनपे मतभेदों को सुलझाने में मददगार साबित होगी। साथ ही जीवन जीने का आनंद प्रदान करेगी।



राजेन्द्र पाण्डेय कई प्रकाशनों वेफ लिए विविध् विषयों पर पुस्तवेंफ लिख चुवेफ हैं। महिला पत्रिका ‘गृह लक्ष्मी’ और ‘गृह नंदनी’ का संपादन कार्य भी लगातार कई वर्षों तक किया है, इसवेफ साथ ही कई पत्रा-पत्रिकाओं वेफ लिए लेखन कार्य भी किया है। इनवेफ द्वारा लिखी गई पुस्तकों में ‘चुटकी भर चंदन’, ‘चाणक्य और चंद्रगुप्त’ ;उपन्यासद्ध, ‘सूचना का अध्किार अध्निियम’, ‘बचाएं अपना विवाह’, ‘पेफस री¯डग’ आदि कापफी च£चत रही हैं।


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  • Author: Rajender Pandey
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